Tuesday, September 25, 2012

दीनक दि‍न.. :: जगदीश प्रसाद मण्‍डल


दीनक दि‍न केना कऽ चढ़तै
मन कहाँ कहि‍यो मानै छै।
रतुके काजे दि‍नो गमा कऽ ‍
बढ़ती कहाँ तानि‍ पबै छै।
दीनक दि‍न केना.....।

बि‍नु तनने घोकचि‍-मोकचि‍ जौं
जाड़ माघ अबैत रहै छै।
चैतक चेत चेतौनी ओहि‍ना‍
सि‍र जेठ धड़ैत रहै छै।
दीनक दि‍न केना.....।

तीन जेठ एगारहम माघ
तीनू लोक देखैत सुनै छै।
देह-पसेना सुरकि‍ चाटि‍ कऽ
माघे ने माघो कहबै छै।
दीनक ि‍दन केना.....।