दीनक दिन केना कऽ चढ़तै
मन कहाँ कहियो मानै छै।
रतुके काजे दिनो गमा कऽ
बढ़ती कहाँ तानि पबै छै।
दीनक दिन केना.....।
बिनु तनने घोकचि-मोकचि जौं
जाड़ माघ अबैत रहै छै।
चैतक चेत चेतौनी ओहिना
सिर जेठ धड़ैत रहै छै।
दीनक दिन केना.....।
तीन जेठ एगारहम माघ
तीनू लोक देखैत सुनै छै।
देह-पसेना सुरकि चाटि कऽ
माघे ने माघो कहबै छै।
दीनक िदन केना.....।
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